नन्हा कवि, गहरी सोच—बाल्यावस्था में ही शब्दों और विचारों की असाधारण गहराई को दर्शाता हुआ एक शांत, गंभीर और रचनात्मक मन।
यह तस्वीर बचपन के उस आत्मविश्वास और सहज मुस्कान को दर्शाती है, जो भविष्य की प्रतिभा और व्यक्तित्व की झलक देती है।
यह तस्वीर शिक्षा पूर्ण करने के उस गर्वपूर्ण क्षण को दर्शाती है, जहाँ मेहनत, आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य की झलक दिखाई देती है।
कवि सम्मेलन में साथी कवि हुल्लड़ मुरादाबादी ,वीरेंद्र मिश्र और भारतभूषण जी के साथ |
सोफे पर पांचवे राष्ट्रपति माननीय फखरुद्दीन अली अहमद ,पंडित गोपाल प्रसाद व्यास ,पीछे श्री राम कुमार चतुर्वेदी
नीरज जी और कवि श्री उदयप्रताप सिंह जी के साथ यह यादगार तस्वीर साहित्यिक मित्रता और रचनात्मक संवाद की सुंदर झलक प्रस्तुत करती है।
पुस्तक
दोनों कवि, प्रोफेसर और पड़ोसी—डॉ. परशुराम शुक्ल 'विरही' व प्रो. रामकुमार चतुर्वेदी 'चंचल' की दोस्ती हर दिन की चाय और साथ में जीए पलों की अनोखी मिसाल है।
राम कुमार चतुर्वेदी चंचल जी अपने सहपाठियों के साथ सहभोज में, माननीय प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी, श्री राजनारायण बिसरिया जी एवं श्री ब्रह्मा पाल जी के संग एक आत्मीय क्षण साझा करते हुए।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा से सम्मान प्राप्त करते हुए प्रो. राम कुमार चतुर्वेदी
अस्सी के दशक में नीरज जी, श्री रामकुमार चतुर्वेदी
सर्वश्री राज नारायण बिसारिया, प्रो. राम कुमार चतुर्वेदी ‘चंचल’, श्री रामनाथ अवस्थी तथा श्री कन्हैया लाल ‘नंदन’ के साथ एक मनोहारी छवि।
प्रो. राम कुमार चतुर्वेदी ‘चंचल’ मंच से काव्य-पाठ करते हुए, अपनी सशक्त वाणी और भावपूर्ण अभिव्यक्ति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते हुए।
प्रो. राम कुमार चतुर्वेदी ‘चंचल’ मंच से अपने विचार व्यक्त करते हुए, सहज अभिव्यक्ति और प्रभावशाली वाणी से श्रोताओं को संबोधित करते हुए।
माननीय प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी, चंचल जी की पुस्तक का विमोचन करते हुए |
माननीय राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा जी, चंचल जी की पुस्तक का विमोचन करते हुए |
सह रही धूप, सह रही ताप, सह रही पुण्य, सह रही पाप, आए कितने बादल घिर-घिर, मुझमें विलीन हो गए आप।